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SIDHARTHA MISHRA

Abstract Inspirational Children

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SIDHARTHA MISHRA

Abstract Inspirational Children

साईं तेरी जय हो

साईं तेरी जय हो

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साईं तेरी लीला है अपरमपार,

गाऊं में तेरी गाथा सदा दिन रात,

तुम चला आते अपने भक्तों के बुलावे पर,

नहीं देर लगता पहुंचने में तुम्हे,

चाहे हो वो जगह भारत या फ्रांस।


कभी दर्शन देते हो आप राम के रूप में,

कभी दीखते हो रहीम आप,

करते नहीं भेद भाव अपने भक्तों में,

चाहे हो वो भक्त हिन्दू या मुस्लमान।


करते हो अपने भक्तों का पालन आप,

नहीं देख सकते उनके आखों में आंसू ;

शिरीड़ी को बनाया धाम आपने,

कहलाये शिरीड़ी के साईं नाथ।


हैँ सब प्राणी प्यारे आपको,

चाहे हो मैंधक या छिपकली,

है पता सबके पूर्ब जन्मों की कहानी आपको,

हैँ सुधारते सबके कर्म और दिखलाते सही मार्ग सबको।


नहीं लौटता कोई भी खाली हाथ तेरे दर से,

हो करते कल्याण सबके।

है ऐसी महिमा आपकी,

की करते सदा ही भक्त आपकी गुणगान।


रकना आपकी आसीर्बाद सदा ही हम पर,

माफ करना हमारी सारी गलती।

हैँ हम आपकी संतान,

हो आप हमारे साईं भगवान।

जय साईं राम।


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