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Shalfnath Yadav

Abstract


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Shalfnath Yadav

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पूणि॔का

पूणि॔का

1 min 170 1 min 170

 दिल वह मेरा चुराए हुए हैं

इसीलिए सर झुकाए हुए हैं 

बात उनसे करो आज कैसे 

वह गले तक चढ़ाए हुए हैं


पाप पर पाप करते हैं  वो ही 

जो कि गंगा नहाए हुए हैं 

खून का रिश्ता जिनसे है मेरा

वह भी देखो पराये हुए है


उनमें कुछ भी नहीं है निराला 

बेवजह रंग जमाए हुए हैं 

जो गलत काम करते रहे वो

अब उसी से लजाये हुए हैं 


'प्रेम' की दोस्ती है सभी से

 सब को अपना बनाए हुए हैं|


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