पूणि॔का
पूणि॔का
1 min
149
खुशियों का हर शख्स यहाँ दीवाना लगता है
तकलीफों से बस मेरा याराना लगता है
लाख छुपाये लेकिन कोई छुपा ना पाता है
मुझको हर चेहरा जाना-पहचाना लगता है
सोने-चांदी से उसका भण्डार भरा है देखा
लेकिन भूख मिटाने को तो दाना लगता
मेरी अपनी नहीं झोपड़ी शीश छुपाने को
मुझको तो अम्बर ही सिर्फ ठिकाना लगता है
इच्छाएं सारी की सारी पूरी किसकी होती है
मन के माफिक सब कुछ मुश्किल पाना लगता है
आते-जाते दुश्मन जब भी गाना गाता है
ऐसा गाना उसका मुझको ताना लगता है
रूप-रंग से 'पॖम' किसी के क्या है लेना-देना
पॖेमी कैसा भी हो हमें सुहाना लगता है।
