प्रकृति
प्रकृति
प्रकृति की हर एक वस्तु
जीवन का बोध कराती है
ध्यान से यदि हम देखे तो
शिक्षा नई दे जाती है।।
पेड़ अपने फल नहीं खाते
पानी नदी ना पीती है
कोयल मीठे गीत सुना
सबका मन बहलाती है।।
फल से लदे पेड़ भी अब
नीचे झुकते जाते है
फूल अपनी खुशबू बिखेर
वातावरण महकाते है।।
जीवन अपना दांव लगा
खुशियाँ हमे दे जाते है
पाँव कुचलेगा या माला बनेगा
सोच ना मन में लाते है।।
बिन भूख के जानवर भी
शिकार कभी ना करते है
ना किसी को भय दिखाते
जंगल की सीमा में रहते है||
हम इंसानों की बात ना पूछो
रोज, गिरगिट सा रूप दिखाते है
कोई होता, जो भला प्राणी
कष्ट उसे पहुंचाते है।।
मार्ग में उसके कांटे बिछा
क्यूँ, बाधा खड़ी कर जाते है।।
घात-प्रतिघात की युक्ति सोच कर
फिर भले बन जाते है।।
