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श्रेया जोशी 'कल्याणी'

Abstract

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श्रेया जोशी 'कल्याणी'

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परिवार

परिवार

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हर बालक की पहली पाठशाला होता है परिवार,

जहाँ से मिलते उसे संस्कार, 

मात-पिता दो पात्र हैं ऐसे,

जो देते जीवनशैली को आकार।


दादा- दादी बिना अधुरा सा लगता है परिवार,

धर्म और आस्था का देते ज्ञान,

साथ ही करते खूब दुलार।


चाचा-चाची नाना-नानी मामा-मामी,

जैसे ढेरों प्यारे रिश्तों से मिलकर बनता एक परिवार, 

अपनी खुशियाँ बांटने को मिल जाते दोस्त- यार,

दु:ख में साथ अडिग खड़ा रहता केवल परिवार।


किसी का बल तो, 

किसी की दुर्बलता का आधार,

लेकिन सबकी पहली आवश्यकता है परिवार।


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