परिवार
परिवार
हर बालक की पहली पाठशाला होता है परिवार,
जहाँ से मिलते उसे संस्कार,
मात-पिता दो पात्र हैं ऐसे,
जो देते जीवनशैली को आकार।
दादा- दादी बिना अधुरा सा लगता है परिवार,
धर्म और आस्था का देते ज्ञान,
साथ ही करते खूब दुलार।
चाचा-चाची नाना-नानी मामा-मामी,
जैसे ढेरों प्यारे रिश्तों से मिलकर बनता एक परिवार,
अपनी खुशियाँ बांटने को मिल जाते दोस्त- यार,
दु:ख में साथ अडिग खड़ा रहता केवल परिवार।
किसी का बल तो,
किसी की दुर्बलता का आधार,
लेकिन सबकी पहली आवश्यकता है परिवार।
