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Er.Saurabh Pandey

Abstract

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Er.Saurabh Pandey

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परिंदे

परिंदे

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परिन्दे है हम,

उन्मुक्त गगन के।


उड़ना है पहचान हमारी,

पिंजड़े में बन्द,

हमारी शान नहीं।


उन्मुक्त गगन में,

घूमना हमारी पहचान है।


स्वतंत्रता प्यारी है,

हमे आज भी।


इस धरती से गगन तक,

विचरण करना हमारी पहचान।


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