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seema singh

Abstract

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seema singh

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"प्रीत"

"प्रीत"

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कुछ साथ मिला उनका ऐसा,

संग हंसना जीना सीख लिया ,

औरों की बात नहीं करते बस,

जीने का बहाना ढूंढ लिया।


कहने सुनने की बात नहीं,

यहाँ मौन शब्दों पर भारी है ,

बिन कहे जो समझे बात सभी,

ऐसी साझेदारी अपनी है।


रिश्तों में बंदिश नहीं यहाँ ,

बस "प्रीत" जुड़ी मन की ऐसी,

मन तुझमे बसा तुम दिल में बसे,

बस और भला अब चाहे क्या।


"प्रीत" की रीत यही है शायद,

बिन बोले कह जाए दिल सब।


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