प्रगतिशील
प्रगतिशील
जहाँ खड़े आज विद्या के बूते, वेद पुराण उपनिषद,
जहाँ द्वैत के, अद्वैत के, सब के ही हैं रहे विशारद ,
तहज़ीब के अभिमान से उठता रहा,
सदियों से जहाँ ज्ञान का मस्तक,
जहाँ नानक बाबा कटार सत्य का,
ले जीत आए भूमध्य तलक
जहाँ विद्यासागर, तिरुवल्लुवर की चली है रीति,
जहाँ ब्रह्मवादिनी गार्गी, जिह्वा से संग्राम हैं जीती,
गुरुदेव, दिनकर, निराला की स्याही ने जहाँ,
रंगी शाल क्रान्ति की,
जहाँ शास्त्रों के आने से पहले, शास्त्रार्थ की रही नीति
उस सरज़मीं पर, हिंसा कमज़ोरी का ही प्रतीक है।
