anuradha nazeer
Abstract
सृजन केवल उस रूप में प्रक्षेपण है
जो पहले से मौजूद है।
जब तक हम भगवान को महसूस नहीं करते
जो शांति का स्रोत है।
हम कभी भी मन की सच्ची शांति
प्राप्त नहीं कर पाएंगे।
कोई
इन चीजों को र...
ज़िन्दगी का क...
प्यार दो
मूल्यवान
जीत
अपने काम से प...
सफलता
प्यार प्यार प...
प्यार की प्या...
वर्षा की रिमझिम बूंदें, अल्हड़पन को जगाई! वर्षा की रिमझिम बूंदें, अल्हड़पन को जगाई!
विचलित मत हो जाना रे मन, धर धीरज धरती बन जाओ। विचलित मत हो जाना रे मन, धर धीरज धरती बन जाओ।
महराबदार जालियाँ आले कहाँ गये । दर औ दीवार घर ,घरवाले कहाँ गये।। महराबदार जालियाँ आले कहाँ गये । दर औ दीवार घर ,घरवाले कहाँ गये।।
बंटे हैं लोग, अक्षरों और शब्दों में, सजे हैं लोग, ख़ूबसूरत कहावतों और मुहावरों से, बंटे हैं लोग, अक्षरों और शब्दों में, सजे हैं लोग, ख़ूबसूरत कहावतों और मुहावरों...
इन्हें तो केवल अपने मतलब की पतंग ही उड़ानी है। इन्हें तो केवल अपने मतलब की पतंग ही उड़ानी है।
कुछ पलों की याद से, उमड़े थे बादल। आँख की कोरों से, बह निकला था काजल। कुछ पलों की याद से, उमड़े थे बादल। आँख की कोरों से, बह निकला था काजल।
मुस्कुराता है वो, माँ के आँचल में, दोस्ती के जज़्बे में , चहकता है, मुस्कुराता है वो, माँ के आँचल में, दोस्ती के जज़्बे में , चहकता है,
आजकल ज्यादा ही व्यस्त रहते हो तो कुछ कह नहीं पाती, आजकल ज्यादा ही व्यस्त रहते हो तो कुछ कह नहीं पाती,
तमाम रात क्या खूब नहाया है। ओलों ने पत्तों का रंग चुराया है। तमाम रात क्या खूब नहाया है। ओलों ने पत्तों का रंग चुराया है।
और हृदयाघात की आहट और हो गया सांसों का अवसान। और हृदयाघात की आहट और हो गया सांसों का अवसान।
पर क्या हमें ये भी पता है कि हम धरती के सबसे बुद्धिमान प्राणी हैं। पर क्या हमें ये भी पता है कि हम धरती के सबसे बुद्धिमान प्राणी हैं।
जिस प्रकार आईना सच दिखाता है, मैं सच देख लेता हूं। जिस प्रकार आईना सच दिखाता है, मैं सच देख लेता हूं।
ऊंचाइयों की गहराई देखते-देखते आनन्दमय चकित होती हूं तैरते-तैरते। ऊंचाइयों की गहराई देखते-देखते आनन्दमय चकित होती हूं तैरते-तैरते।
जिंदगी किताब ही तो है जिसका एक अध्याय हर रोज शुरू होता है। जिंदगी किताब ही तो है जिसका एक अध्याय हर रोज शुरू होता है।
कभी तुम्हारी गर्म हथेलियों का स्पर्श महसूस होता है मरहम सा .... कभी तुम्हारी गर्म हथेलियों का स्पर्श महसूस होता है मरहम सा ....
रख देती हैं उद्गारों को गालों पर तत्काल। रख देती हैं उद्गारों को गालों पर तत्काल।
ना करूँ मदद किसी का तो निष्ठुर बतलाता है ना करूँ मदद किसी का तो निष्ठुर बतलाता है
चौखट पर मचल रही थी ऊपर नीचे फिसल रही थी। चौखट पर मचल रही थी ऊपर नीचे फिसल रही थी।
बारिश की रिमझिम फुहारों में भीग कर झूम उठती है धरती। बारिश की रिमझिम फुहारों में भीग कर झूम उठती है धरती।
मनोकामना पूर्ण करें मंगला गौरी-शिव दूध जल से जो करें अभिषेक मनोकामना पूर्ण करें मंगला गौरी-शिव दूध जल से जो करें अभिषेक