bittu thapa
Romance
अगर तू नहीं है तो फर्क क्या है
क्या में आसूंओं सा टपक जाऊंगा।
माना तेरी जरूरत महसूस होती है
तो क्या में तेरे लिए तरस जाऊंगा।
तुझसेे हुई दिल्लगी
आखरी दिल्लगी होगी मेरी
मै कोई आवारा बादल नहीं
जो फिर कहीं बरस जाऊंगा।
फर्क क्या है ...
हाथ मेरे हाथों में थे तुम्हारे लेकिन दिल से मेरे नहीं थे तुम। हाथ मेरे हाथों में थे तुम्हारे लेकिन दिल से मेरे नहीं थे तुम।
भले जिस्म दो हों अकेला अधूरा वही प्रेम है जो रहे रूह वाला।। भले जिस्म दो हों अकेला अधूरा वही प्रेम है जो रहे रूह वाला।।
अपना लो और आ जाओ बांहों में, तुम्हें अपना गुलिस्तां बना दूँ अपना लो और आ जाओ बांहों में, तुम्हें अपना गुलिस्तां बना दूँ
ओस की नन्ही कंपकंपाती बूँद की तरह, जिसमें ठहरा है स्वादिष्ट लावा, जिसकी चाशनी में डूब ओस की नन्ही कंपकंपाती बूँद की तरह, जिसमें ठहरा है स्वादिष्ट लावा, जिसकी चा...
तो क्या ये सबका जुड़ना और लगाव अनायास यूँ ही होता? तो क्या ये सबका जुड़ना और लगाव अनायास यूँ ही होता?
रेल की पटरी की तरह हैं हम दोनों ताकते रहते हैं एक दूसरे को दूर से ही। रेल की पटरी की तरह हैं हम दोनों ताकते रहते हैं एक दूसरे को दूर से ही।
मेरी कल्पना क्या है रूप तुम्हारा ? मुझको भी बताओ, मेरी कल्पना क्या है रूप तुम्हारा ? मुझको भी बताओ,
तुम कभी फूलों सी तो कभी पंखुड़ी गुलाब की लगती हो। तुम कभी फूलों सी तो कभी पंखुड़ी गुलाब की लगती हो।
उसकी नशीली आंखें इस कदर जादू कर गईं. उसकी नशीली आंखें इस कदर जादू कर गईं.
दिल के कोरे पन्नों पर मुस्कुराने की वजह लिख दो, तुम क्या चाहते हो एक बार हंस कर हमसे। दिल के कोरे पन्नों पर मुस्कुराने की वजह लिख दो, तुम क्या चाहते हो एक बार हंस...
प्रिय लिखूँ प्रियतमा लिखूँ, बस मेरी लिखूँ या प्यारी भी संग, प्रिय लिखूँ प्रियतमा लिखूँ, बस मेरी लिखूँ या प्यारी भी संग,
अंधेरे में कुछ पल को खो जाए जब, तो फिर याद आये मुझे अपना रब, अंधेरे में कुछ पल को खो जाए जब, तो फिर याद आये मुझे अपना रब,
ये दो शारीरिक आत्मायों की भूख है ,इस खेल में कोई हार - जीत नहीं। ये दो शारीरिक आत्मायों की भूख है ,इस खेल में कोई हार - जीत नहीं।
तेरे बिना जिंदा तो हैं लेकिन पत्थर बन गये हैं तेरे बिना जिंदा तो हैं लेकिन पत्थर बन गये हैं
इंतजार में क्यों अपना वक्त गंवाना इंतजार में यार हुये बहुत तार तार इंतजार में क्यों अपना वक्त गंवाना इंतजार में यार हुये बहुत तार तार
रात ख्वाबों में अक्सर कुछ धुंधली-सी यादों का बसेरा हो जाता है। रात ख्वाबों में अक्सर कुछ धुंधली-सी यादों का बसेरा हो जाता है।
भावनाओं की जगह, तर्क हावी होने लगता है और जान का रुतबा भी बदलने लगता है। भावनाओं की जगह, तर्क हावी होने लगता है और जान का रुतबा भी बदलने लगता है।
मै वो बारिश अभी भी देख सकता हूँ साथ महसूस कर सकता हूँ मिट्टी मे उठनेवाली वो सुगंध। मै वो बारिश अभी भी देख सकता हूँ साथ महसूस कर सकता हूँ मिट्टी मे उठनेवाली वो...
मैं जो कलम हूं तो स्याही तुम हो मैं अगर किताब हूं को पन्ना तुम हो मैं जो कलम हूं तो स्याही तुम हो मैं अगर किताब हूं को पन्ना तुम हो
अगर उनकी समस्याओं और परेशानियों को दूर करने के लिए कुछ किया जा सकता है। अगर उनकी समस्याओं और परेशानियों को दूर करने के लिए कुछ किया जा सकता है।