STORYMIRROR

Tanisha Jainwal

Romance

4  

Tanisha Jainwal

Romance

पहला इश्क़

पहला इश्क़

1 min
218

पहली बार मिली तो

कुछ ख़ास ना हुआ एहसास

लेकिन बेचैनी हुई उसके

दोबारा दीदार की


दूसरी बार मिली तो

बढ़ी बेचैनी और ज़रा-सी

बेताबी भी


तीसरी बार मिली तो

जाना आशिकों के

पागलपन को भी


चौथी मुलाकात में

नज़र भर जो देखा उसने

तो हारा दिल भी अपना पहली बार

तब जाना क्यों है दर्जा ऊंचा मोहब्बत का


"उनके" दीदार का सिलसिला बढ़ा

तो साथ ही बढ़ी बेचैनी और ज़रा-सी बेताबी भी

जारी है ये सिलसिला अभी भी


लगता है आशिकों के पागलपन में मैं भी हूं शुमार कहीं,

क्योंकि नही छोड़ती पीछा अब ये बेचनी और बेताबी मेरा कहीं


सुना है कोई दवा नहीं इस मर्ज की बाज़ार में कहीं

"उनके" दीदार से मर्ज को पड़ता आराम ज़रा

पर उनसे दूरी अंदर ही अंदर लेती है जान मेरी


ए-खुदा बता इस मर्ज का इलाज कोई

कर कोई दवा इस पागलपन की

नहीं तो ले जायेगा ये "पहला इश्क़" एक दिन जान मेरी

वो पहली सी मुलाकात की स्मृतियां ले लेगी एक दिन

जान मेरी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance