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Shobha Kanase

Drama

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Shobha Kanase

Drama

पहचान

पहचान

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हमने जन्म लिया

समझा, अब ये जीवन है सिर्फ मेरा

पर धीरे-धीरे ज्ञात हुआ

ये जीवन सिर्फ नहीं मेरा, ये तो है हमारा।


ढूँढा बहुत अपने आप को ?

ये बेटी, बहू, पत्नी, माँ इन रिश्तों से है जुड़ा

ये सवाल अब भी है खड़ा ?


इस उत्तर को ढूँढा हमने हर घड़ी

हर बार प्रश्न ? प्रश्न बनकर ही रहा ?

जनम मेरा; पर पहचान मेरी कोई और बना

रिश्तों के नाम से, उसका रूप निखरा।


इन रिश्तों की प्यार भरी डोर ने

मेरा जीवन हर किसी का बन गया

अपने-आप को ढूँढते-ढूँढ़ते उस राह पर आ गए

न जीते बनेगा; न मरते बनेगा।


'जीवन ' जो मैं 'जी ' भी नहीं

उसे 'कर्म ' का फल कहकर जीना पड़ा

आखिर 'दिल' और 'जिंदगी' ने मान लिया

जीवन 'मैं ' नहीं; 'मैं' जीवन के लिए बना

'मैं' जीवन के लिए बना।


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