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Dheeraj kumar shukla darsh

Inspirational

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Dheeraj kumar shukla darsh

Inspirational

नव आशाएँ

नव आशाएँ

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जैसे नवसृजन होता है

हर पतझड़ के बाद

वैसे नव आशाएँ रखो

जीवन में हर बार 

सूरज जब ढल जाता है


घोर अंधेरा छा जाता है

लेकिन हर सुबह फिर

वो प्रकाश फैलाता है

वैसे ही जीवन में 

फैला हुआ जो अंधकार है

उसको दूर करने का


नवप्रभात में रंग भरने का

नवसृजन फिर करने को

प्रकृति करती विचार है

वैसे ही आगे बढ़ने का

नव आशाओं 

संग चलने का

जीवन में करता 

नव संचार है।


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