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Kavita Sharrma

Abstract

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Kavita Sharrma

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नशा

नशा

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जीवन की मधुशाला में

नशे की कमी ‌नहीं 

कभी है पैसे का नशा

कभी है अंह का नशा

कभी खूबसूरत होने का नशा

कभी है मय का नशा

नशा तो आखिर है नशा

नहीं ज़रा भी है खरा

जो भी इसमें डूबा

वही इसमें बुरा फंसा।


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