STORYMIRROR

Kavita Sharrma

Abstract

3  

Kavita Sharrma

Abstract

नशा

नशा

1 min
293

जीवन की मधुशाला में

नशे की कमी ‌नहीं 

कभी है पैसे का नशा

कभी है अंह का नशा

कभी खूबसूरत होने का नशा

कभी है मय का नशा

नशा तो आखिर है नशा

नहीं ज़रा भी है खरा

जो भी इसमें डूबा

वही इसमें बुरा फंसा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract