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Satish Chandra Pandey

Inspirational

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Satish Chandra Pandey

Inspirational

नए पलों की नई उमंगें

नए पलों की नई उमंगें

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नई उमंगें, नया सवेरा

आज मान ले कहना मेरा

कदम बढ़ा ले उन्नति पथ पर

क्यों बीती चिन्ता ने घेरा।

रात-रात भर सपने देखे

इधर-उधर की भारी उलझन

कहाँ भटकता रहा रात भर

दिन होते ही भूल गया मन।

अच्छे और बुरे सपनों का

अब विश्लेषण छोड़ भी दे तू,

उठ बिस्तर से निर्मल हो जा

स्वप्न की बातें छोड़ भी दे तू।

नए पलों की नई उमंगें

नई राह देखे पग तेरा,

नए लक्ष्य पर आज गाड़ दे

अपना झंडा, अपना डेरा।


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