STORYMIRROR

MANSI SINGH

Abstract

4  

MANSI SINGH

Abstract

नारी

नारी

1 min
217

सूर्य की तेज किरण में

घने पीपल का छाव हो तुम, 

कभी ज्वाला, तो कभी चन्दन 

हे नारी सभी रूप मे तेरा अभिनन्दन


कभी झरने की तेज धारा 

तो कभी सांत नदी का नीर हो तुम

कभी गौरी, कभी शैलपुत्री तो 

कभी काली कालरात्रि का रुप हो तुम। 


कभी ममता की देवी,

कभी स्नेह का आंचल हो तुम। 

कभी क्रोध कि चिंगारी, 

तो कभी त्याग,

बलिदान का दुसरा नाम हो तुम। 


करुणा भाव का प्रतीक बन

परिवार को बांध रखने वाली डोर हो तुम, 

माँ, बहन, पत्नी, बेटी के रुप

बन जीवन का आधार हो तुम, 

हे नारी ईश्वर का वरदान हो तुम।


Rate this content
Log in

More hindi poem from MANSI SINGH

Similar hindi poem from Abstract