STORYMIRROR

MANSI SINGH

Abstract

4  

MANSI SINGH

Abstract

नारी

नारी

1 min
219

सूर्य की तेज किरण में

घने पीपल का छाव हो तुम, 

कभी ज्वाला, तो कभी चन्दन 

हे नारी सभी रूप मे तेरा अभिनन्दन


कभी झरने की तेज धारा 

तो कभी सांत नदी का नीर हो तुम

कभी गौरी, कभी शैलपुत्री तो 

कभी काली कालरात्रि का रुप हो तुम। 


कभी ममता की देवी,

कभी स्नेह का आंचल हो तुम। 

कभी क्रोध कि चिंगारी, 

तो कभी त्याग,

बलिदान का दुसरा नाम हो तुम। 


करुणा भाव का प्रतीक बन

परिवार को बांध रखने वाली डोर हो तुम, 

माँ, बहन, पत्नी, बेटी के रुप

बन जीवन का आधार हो तुम, 

हे नारी ईश्वर का वरदान हो तुम।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from MANSI SINGH

नारी

नारी

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Abstract