मुसलसल
मुसलसल
तहरीर मुसलसल है ,तक़रीर मुसलसल है ,
और महेरबाँ हमारी तक़दीर मुसलसल है ,
तूफान कई आए इस ज़िंदगीमें अब तक ,
हर बार पर हमारी तदबीर मुसलसल है ,
है पूछना खुदासे , ऐसा है क्यों बनाया ,
चारों तरफ जहाँमें तक़्सीर मुसलसल है ,
दहशतग़रोंकी देखो ये दहशतें है कैसी ,
हर खौफमें उन्हींकी तसवीर मुसलसल है ,
फिरभी हैं बंदगीमें मसरुफ सब खुदा की ,
सुबहा से शाम देखो तकबीर मुसलसल है ,
रखना तू स्तब्ध सोच तेरी अपने तलक ही,
यहां सोचनेवालोंकी तहक़ीर मुसलसल है ।
