मुस्कुराना
मुस्कुराना
मुस्कुराने के मकसद न देखो
कोई बहाना या ठिकाना न देखो
कभी बेवजह भी मुस्कुरा कर देखो
तो जिंदगी को भी मुस्कुराते हुए देखो
सच्ची मुस्कुराहट हमें तरोताजा कर देती है
अपनी खुशी को अनचाहे व्यक्त कर देती है
इससे मिलने वाले को भी प्रसन्न कर देती है
और मनुष्य के व्यक्तित्व को भी निखार देती है
जो इंसान खुद मुस्कुराना जानता है
वह दूसरों को खुश देखना चाहता है
खुदा भी उसके चेहरे की रौनक देखता है
उसकी मुस्कुराहट कभी नहीं छीनता है
हर इक मुस्कुराहट खुशी नहीं होती
नफरत हो या मोहब्बत एक सी नहीं होती
आँसू गम के या खुशी के एक जैसे होते है
इनकी पहचान आसान नहीं होती।
फूल बनकर मुस्कुराना जिंदगी है
मुस्कुराकर गम भुलाना जिंदगी है
जीतकर खुश हुए तो क्या हुआ
हारकर भी मुस्कुराना जिन्दगी है।
