मुझे अनशन करना है
मुझे अनशन करना है
हास्य -मुझे अनशन करना है ***************** अभी-अभी मित्र यमराज आये जाने क्यों थे, एकदम बौखलाए, मैंने कहा - क्या हुआ यार जो भागते हुए यहाँ आए। यमराज ने बताया - कुछ खास नहीं बस मुझे अनशन करना है अन्ना हज़ारे से मुकाबला करना है, आपको सिर्फ मेरा साथ देना है और कल का केजरीवाल बनना है। उसकी बात सुनकर मुझे गुस्सा तो आया फिर भी मैं मुस्कराया और समझाया तुझसे अनशन का भूत कहाँ टकराया। आखिर तेरे अनशन का उद्देश्य क्या है? अनशन की सलाह देने वाले शुभचिंतक का नाम क्या है? यमराज झुँझलाया - मुझे कुछ नहीं पता बस! मुझे अनशन करना है। मुझे भी नाम- शोहरत चाहिए मीडिया सोशल मीडिया में प्रचार, प्रसार चाहिए । कारण आप सोचते रहिए अनशन की कागजी प्रक्रिया को पूरी कर सीधे दिल्ली के रामलीला मैदान में आइए। मैं अनशन करने वहीं जा रहा हूँ भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी आपको दे रहा हूँ, जाने किस-किस को धमका कर यहाँ आया हूँ अब आप मना मत करना वरना मोदी जी के पास जाऊँगा पप्पू को भारत रत्न मिलना चाहिए, समझाऊँगा। लीजिए! अब कारण भी बता रहा हूँ। बेचारा हैरान परेशान हो रहा है, वो जो चाहता है, उसे मिल ही नहीं रहा है चुनाव दर चुनाव हार रहा है नाहक हँसी का पात्र बन रहा है, क्या अनशन का यह उचित आधार नहीं है? देखते जाइए! मेरे अनशन से सरकार हिल जायेगी इसके आगे हर समस्या बौनी हो जायेगी, तब ही आपके प्रधानमंत्री को अक्ल आयेगी। वे दल-बल के साथ दौड़ें-भागे मेरे पास आयेंगे मुझे जूस पिलाकर अनशन तुड़वायेंगे, पप्पू को भारत रत्न देने का हुक्म सुनाएंगे। यमराज की बात सुन मैंने अपना माथा पीट लिया ऐसा लगा जैसे इसने नशा कर लिया, मैंने उसे पकड़ कर बाँध दिया शाम तक खाना-पानी भी नहीं दिया, समय के साथ भूख-प्यास से उसका नशा उतर गया, उसने मासूमियत से कहा - प्रभु! मुझे आपने इस तरह बाँध क्यों दिया ? या भूख-प्यास से मारने का विचार कर लिया? क्या मैंने कोई बड़ा अपराध कर दिया? जो आपने मुझे इस तरह की सजा दे दिया। मैंने उससे कहा- नहीं यार! मैंने तो कुछ नहीं किया पर तेरे अनशन की जिद ने मुझसे ये अपराध जरुर करा दिया और मैं ऐसा करने को विवश हो गया। यमराज हाथ जोड़कर बोला - प्रभु! आपने जो किया, अच्छा किया अब मुझे माफ़ी देकर आजाद करो कुछ खाने-पीने का तत्काल इंतजाम करो, भूख-प्यास से मेरी जान जा रही है, मुझे अनशन वनशन से क्या मतलब वैसे भी वो मेरा सगेवाला तो है नहीं, फिर भारत रत्न कोई खिलौना भी नहीं? जो किसी ऐरे गैरे को दे दिया जाना चाहिए, फेल डिवीजन पास पप्पू को तो सौ जन्मों बाद भी नहीं मिलना चाहिए। हाँ! उसको मेरी मुफ्त की सलाह पर तत्काल अमल करना चाहिए, अब उसे संन्यासी बन जाना चाहिए भगवा पहनकर धूनी रमाना चाहिए, अपने खानदान के पापों का प्रायश्चित करना चाहिए। मुफ्त की सलाह के लिए उसे मेरा धन्यवाद करना चाहिए, मुझे अपना गुरु मान लेना चाहिए। पर उससे इस तरह की उम्मीद रखकर मुझे तो बेवकूफों वाला कोई काम भी नहीं करना है। वैसे भी कोई काम तो वो ढंग से कर ही नहीं पायेगा इसलिए पप्पू को बेरोजगार ही रहना चाहिए। अब मैं भी अनशन का विचार छोड़ रहा हूँ आपका इतना तो सम्मान कर ही रहा हूँ, भोजन की थाली का इंतजार कर रहा हूँ। इतना जरूर है कि आपने मुझे अनशन से बचाकर बड़ा अपराध करने से बचा लिया है, इसके लिए आपका बारंबार आभार, धन्यवाद कर रहा हूँ दोनों हाथ जोड़, शीश झुकाकर प्रणाम कर रहा हूँ फिर कभी अनशन की बात सपने में भी नहीं सोचूंगा इस बात का आज वचन भी दे रहा हूँ अपनी नादानी के लिए फिर से क्षमा माँग रहा हूँ। सुधीर श्रीवास्तव
