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Vijay Indushokai

Abstract

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Vijay Indushokai

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मरीचिका

मरीचिका

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क्या यह सत्य नहीं, की सत्य नहीं

चलता आ रहा नित्य, नित्य नहीं


सच्चाई झुठों की, यहााँ झूठ नहीं

क्या तथ्थो के तथ्थों मे, तथ्थ नहीं


कथ्थे सभी के है, सत्य अपने-अपने

क्या परछाई अपनी खुदकी, सत्य नहीं


सभी शरीफ़ है यहााँ, शराफ़तभी तो है

क्या हिंसक दंगे मन के, कृत्य नहीं


सभी रंग खुशबू देते हैं, अलग- अलग

क्या काला-सफ़ेद करना, मिथ्थ नहीं


मैं राज़ी हुूँ, चमड़ी उधेड़ निष्ठा दिखा दूॅं

क्या आप है संग मरीचिका, सत्य नहीं।


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