STORYMIRROR

Sakshi Sul

Romance

3  

Sakshi Sul

Romance

मोहब्ब्त!

मोहब्ब्त!

1 min
391

तेरे किसी सवालों का ज़वाब नहीं था

रूठी तो मैं भी थी मनाने तू नहीं था


हर बात कहने से ही समझ आए,

तो प्यार का इजहार क्यों करे ?


मेरी हँसी के पीछे का ग़म तू देख न पाया

फ़िर मोहब्बत का‌ नाम क्यों दे ?


~Sakshi🤎


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance