मनुष्य
मनुष्य
मनुष्य को भी भावनाएं हैं,
मनुष्य भी आनंद से
जीना चाहते हैं,
मनुष्य को भी दिल है,
मनुष्य भी दिल से
जीना चाहते हैं,
पर
यंत्र मनुष्य को
इतना आकर्षित
किया है कि ......
आज मनुष्य, यंत्रों के बीच, यंत्रों से
यंत्र बनते जा रहा है ......
हे मनुष्य यंत्रों से काम
करना ग़लत नहीं है
पर...पर
आप यंत्र मत बनो......
