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Nisha Bharti

Abstract Inspirational

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Nisha Bharti

Abstract Inspirational

✍️मन का पंक्षी ✍️

✍️मन का पंक्षी ✍️

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मन यूंही उड़ चला है ,

बिना सोचे- समझे बह चला है।

परवाह नहीं है इसको,

आज कल फिक्र कहां है किसी को।

दुनियादारी के झमेले से ,

आने वाले दिनों के बखेड़ों से ,

काश घूमूं मैं , काफी फिरूं मैं,

मगन हो जाऊं कभी ,

मस्त हो चाऊं कभी ।

ना ना अब बहाना न बनाओ ,

आना है तो आओ।

चाय की चुस्की , अपनों की थपकी,


बिस्कुट का मजा, सपनों का साथ,

ओ हो !क्या है कहना ...

आह !कितना है मौसम सुहाना।


काली घटा छाई हुई सी ,

अनोखे गीत गाती हुई सी, 

मनभावन, मनलुभावन,

सुगंधित, सुशोभित ,

सारा जहां है खुशनुमा ,

सब हैं एक-दूसरे  पर मेहरबान।





Bhartinishi from kitabo ki duniya se ka 

मस्तमौला मौसम और सुहावना सफर का अनोखा मेल 🤞🌹🌼🌻🍁🍁🍂🍂🌿🌱☘️🍀🌴🌳🌞🫶



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