✨😽मोरे कृशु 😽✨
✨😽मोरे कृशु 😽✨
मोरे सांवरिया ,मैं तोरी बावरिया ,
का भयो भोर -भोर बंसी बजइया ।
का खोयो -खोयो खुद खवइया,
मोको मन नाहीं लागत बा ,
तोको तन माहीं बसावत बा।
नैन तरस -तरस जावे,
आंखन मा आंसू बह -बह आवे,
चैन बिखर -बिखर गयो,
मनन मा मुख बसा -बसा लियो ।
ऐसो रे माखन चोरवा,
कैसो रे चाखन मोरवा
मारे का छली गईल कृष्ण ललनवा,
तारे का कवि कईल कृशु जगनवा ।
गन्ना का प्यारो होवे ,
दुर्गों मा का लाडलो कहवे ।
हमरे सबरे जगना जगना जगना जगना ,
जय हो ,जय हो ,जय हो ,जय हो ,
श्री कृशु! श्री!कृशु श्री! कृशु !श्री कृशु !
