STORYMIRROR

Mamta Rani

Abstract Inspirational

4  

Mamta Rani

Abstract Inspirational

मन का आँगन

मन का आँगन

1 min
12

याद हर पल आती है 

माँ हमारा वो आँगन

साथ तुम्हारे जो बीते

 सुकून भरा बचपन


ना चिंता किसी चीज की

ना ही कोई होता गम

गोद में तुम्हारी मीठी लोरी

बनती मन की मन से डोरी


बड़े हुए बचपन बीता

आयी जिंदगी में बहुत मोड़

जब जिम्मेदारियों ने ली

जीवन के सपने को तोड़


तब याद हर पल आती है

माँ हमारा वो आँगन

साथ तुम्हारे जो बीता

सुकून भरा बचपन


अब सूना -सूना है

 मन का आँगन

कहीं ना भाए ये बावरा मन


जहाँ खोये सपने

और कुछ रूठें अपने

अब वो आँगन कहाँ

सुकून हो मन की जहाँ



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract