मन चंगा तो कठौती में गंगा...
मन चंगा तो कठौती में गंगा...
मन चंगा तो कठौती में गंगा, रविदास जी ने समझाया है।
भक्ति भाव से ओत-प्रोत हो, सबको सत्य दिखाया है।
अविनाशी का नाम जपो रे, यह जीवन की माया है,
संत रविदास की शरण में आकर, जन-जन ने सुख पाया है।
न जात-पात का बंधन कोई, न कोई ऊँच-नीच मानी...
सच्ची भक्ति ही ईश्वर है, यह बात जगत ने है जानी...
प्रभु के चरणों में मन अर्पण, जिसने किया वो सुखी हुआ,
हृदय में जिसके प्रेम बसा, वो परम सत्य का रूप हुआ।
हाथों में है कर्म का धागा, मुख पर प्रभु का नाम रहें...
सेवा ही सर्वोपरि पूजा, संत यही हर बार कहें...
चित्त शांत और निर्मल जिसका, गंगा वहीं समाती हैं।
सत्य मार्ग पर चलने वालों की, प्रभु स्वयं लाज बचाते हैं।
प्रभु तुम चंदन, हम हैं पानी; अंग-अंग बास समानी है।
भक्त और भगवान की महिमा, रविदास जी ने बखानी है।
अमर ज्योति है ज्ञान की जलती, अंधकार सब मिट जायेगा,
जो रविदास के पथ पर चलता, भवसागर तर जाएगा।
जय रविदास, जय संत शिरोमणि, गूँज रहा आकाश है।
प्रभु चरणों में प्रीति रहे, बस यही एक आस हैं।🙏🏻⛳
