अमर सत्य सनातन
अमर सत्य सनातन
सत्य सनातन धर्म हमारा, जग में सबसे न्यारा है।
आदि पुरुष का यह पथ पावन, सबका भाग्य संवारा है।
ॐ की गूँज में बसता जो, वो प्राणों का आधार है,
अविनाशी यह ज्ञान हमारा, संस्कृति का सार है।
वेदों की ऋचाओं में, जिसका गान निराला है।
ऋषि-मुनियों के तप से, फैला यह उजियाला है।
जहाँ कर्म ही पूजा है और मानवता ही धर्म है,
सत्य की राह दिखाता जो, वो पावन पुरुषार्थ है।
नदियों की कल-कल में गूँजे, पावन नाम तुम्हारा है।
गंगा की निर्मल धारा ने, जन-जन को ही तारा है।
पीपल, तुलसी और बरगद में, ईश्वर का ही वास है,
धरती माता की ममता में, अटूट एक विश्वास है।
गौ सेवा में पुण्य बसत है, पर्वत देव स्वरूप हैं।
प्रकृति के कण-कण में खिलते, प्रभु के अगणित रूप हैं।
सूरज की पहली किरण भी, वंदन यहाँ सिखाती है,
पवन की शीतल मंद लहर, हरि गुण गाती जाती है।
सर्वे भवन्तु सुखिनः का, यह पावन संदेश है।
प्राणी मात्र का भला हो जिसमें, ऐसा यह उपदेश है।
युग बदले पर सत्य न बदला, यह सदा अमर अविनाशी है,
हर हृदय में ज्योति जला दे, जो ज्ञान का शुभ प्रकाश है।
ध्रुव पद जय सनातन, जय सनातन, गूँज रहा आकाश है।
प्रभु चरणों में प्रीति रहें... बस यही एक आस हैं।
