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कमल सिंघल

Inspirational

4.5  

कमल सिंघल

Inspirational

शाश्वत सत्य और अपनत्व...

शाश्वत सत्य और अपनत्व...

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सत्य की इस कठिन डगर पर, भ्रम का पर्दा गिराना हैं...
भीड़ बहुत है इस दुनिया में, पर सबको अकेले ही जाना हैं।
रिश्ते-नाते, माया-बंधन, सब यहाँ छूट जाने हैं...
एक दिन सब राख की ढेरी, मिट्टी में मिल जाने हैं।
किन्तु सत्य को जानकर भी, जीवन का धर्म निभाना हैं...
हर अनजाने चेहरे में भी, अपना रूप ही पाना हैं...
जब कोई अपना है ही नहीं, तो पराया भी फिर कौन यहाँ..?
सबको अपना मानकर ही, महकाना है सारा जहाँ...
हृदय में सबके प्रति करुणा हो, प्रेम की सरिता बहती हो...
बिना किसी स्वार्थ के ही, जग की सेवा चलती हो...
अकेलेपन की इस सच्चाई को, मधुर प्रेम से ढंकना हैं...
सत्य यही है, फिर भी हमें सबको अपना ही कहना हैं...
जीवन का यह श्रेष्ठ मार्ग, सबको साथ लेकर चलना हैं...
स्वयं प्रकाश बन जाएँ हम, ऐसा दीपक बनना हैं...


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