मिट्टी का शरीर
मिट्टी का शरीर
मिट्टी का ये शरीर
मिट्टी में मिल जायेगा
इतना क्यों है गुरुर,
क्या है तेरा वजूद,
क्या लेकर आया था
ओर क्या लेकर जाएगा
पानी की बून्द जैसी
है ये जिंदगी
ना जाने कब टपक जाएगी
हवा के एक झोंके कि
फर्क है
क्या पता ! किस दिन
थम जाएगी
सूखे पत्तों की तरह
बिखर के,
मिट्टी में मिल जाएगी।
