बरखा आई
बरखा आई
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बरखा आई बरखा आई
आई मिलन की ऋतु,
पेड़ पौधे सब खिल रहे है
उम्मीद की किरण है तू।
आया सावन का महीना
बारिश की बूंदे ले के,
भीगा दिया हर किसी को
कोई ना खुद को रोके।
ऋतुओं की तू रानी बुलाती
तुझ में बसी है जान
कड़ी धूप में बरस जा जरा
छोड़ दे तू आसमान।
जुगनु चमका बादल गरजा
आई बरखा रानी,
सागर, सरोवर भर जाएंगे
खेत मे होगा पानी।
