महोबत
महोबत
महोब्बत में अकसर, ऐसा हो जाता है
चेहरे पे चेहरा, नजर आ जाता है
आँखों में नमी सी छा जाती है
दिल की बात जुबाँ पर आ जाती है
महोब्बत...
होठ चुप रहते हैं, आँखें बोलती है
धड़कता है दिल, पर सांसें रुक जाती है
दिल से जो निकलती है,रुह तक पहुंचती है
इश्क में खामोशियाँ हरदम बोल जाती है
महोब्बत...
बातें उनसे हो और खत्म ही न हो
अकसर उनकी याद दिल में बस जाती है
आपकी हाँ का भी इतजार नहीं हे हमें तो
सिर्फ मृदुल मन तुम्हें चाहे वही काफी है।
महोब्बत......
