STORYMIRROR

Subhangi Sahoo XI-H -41

Abstract

2  

Subhangi Sahoo XI-H -41

Abstract

मगर ..

मगर ..

1 min
122

हम खुदको आप में ढूंढ़ने की कोशिश करते हैं

मगर धुंधला सा दिखता है ।

पता नहीं क्या कमी रह गई 

जितना ढूंढ लूँ प्यार नहीं मिलता है।


सब में आपका चेहरा ढूंढने की कोशिश करते हैं

मगर खुद को रोक लेते हैैेैें

आपके पास जाने की कोशिश करते हैं

पर पता नहीं हमेशा अपने आप को टोक देते हैं।


अपने आप को आपके साथ देखने की कोशिश करते हैं 

मगर दिल साथ नहीं देता।

जितना नफरत करने की कोशिश करते हैं

उतना ही प्यार अजाता।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Subhangi Sahoo XI-H -41

मगर

मगर

1 min पढ़ें

मगर

मगर

1 min पढ़ें

मगर ..

मगर ..

1 min पढ़ें

मगर!

मगर!

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Abstract