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Silisti Karuriya

Romance

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Silisti Karuriya

Romance

मेरे बदरा तेरे लबो से टकरा गए।

मेरे बदरा तेरे लबो से टकरा गए।

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हे जिंदगी, ये भीगे से जज्बात,

बस तेरे मंज़िल के नाम है,

और ये डूबे से रास्ते तेरे घर के आंगन के नाम है।

पर तूने मुझे बादलों से बारिश बना कर

कहीं और खड़ा कर दिया।

जहाँ से दूर दूर तक भी,

तेरी मंज़िल का कोई नाम नहीं है।

फिर भी बादलों की बारिश बन कर, 

तेरे शहर में बरस रहा हूँ।


अनजान हवा बन कर, 

तेरा गुमनाम रास्ता ढूंढ रहा हूँ।

अचानक मेरे बदरा तेरे लबों से टकरा गए,

और अपने लबों से चूम कर, 

इस बारिश को अपना बना ले।

मेरी बारिश में तेरे गुमनाम रास्तों को भीगने दे।

भीगी बारिश में कहीं से वो रास्ता मिल जाए,

जहाँ गीले पावों से चलकर जो सकून मिलता है,

वो तेरे गुमनाम शहर में कहाँ।


मुझे मेरी मंज़िल ना भी मिले,

पर तेरे गुमनाम शहर में ना, 

बरसने का ग़म भी नहीं होता।

उस भीगे रास्ते में फिर से,

बरसने का मौका तो दे। 

जिंदगी भर की ख़ुशी ना दे सको तो,

पल भर की ख़ुशी तो दे।


मेरी मंज़िल कुछ और थी, 

पर मेरे बदरा तेरे लबों से टकरा गए।

फिर तेरे शहर में तूफान आये तो आने दे।

तेरे आँखों का काजल मेरे बदरा में मिल कर,

तेरी जुल्फों से मेरे चिंगारिया, 

बिजली बन कर गिर रही है।

उस तूफान में तुम और मैं बारिश बन कर,

उस गुमनाम सड़को पे बह जाये।

तुम और मैं मिट्टी का लिबास बन, 

कर एक दूजे पे लिपट जाये।



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