मैं स्त्री हूं....
मैं स्त्री हूं....
लिखने की हद में आऊं तो बहुत कुछ लिख जाती हूं
स्थिति परिस्थितियों से जूझते हुए
एक नया गांव बसाती हूं...
मै स्त्री हूं
रोज एक नया अध्याय सजाती हूं
कभी अपनों के लिए
कभी औरों के लिए
हर पथ पर सबको सही राह दिखाती हूं
मै स्त्री हूं
अपने आंचल में हर दुख को सुख से सजाती हूँ।
