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संजय कुमार

Abstract

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संजय कुमार

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मैं एक वृक्ष हूं

मैं एक वृक्ष हूं

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मैं एक वृक्ष हूं

जल का मैं हूं साथी,

पवन मेरा है सारथी 

पथिक का मैं रखवाला,

पथिक को आराम है मिलता

जब वो मेरी छाया में विश्राम करे,

जिस पथ में मेरा निवास न हो

उस पथ में राही छाया को तरसे,

हर जीव का भर जाता मन

जब थोड़ा सा मैं आवाज करूं!


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