STORYMIRROR

Meena Mallavarapu

Inspirational

4  

Meena Mallavarapu

Inspirational

मायाजाल(3)

मायाजाल(3)

1 min
328

 कोशिशें की कईं मगर न जाने क्यों नाकाम हुईं

रिश्तों को संजोने का किया अथक प्रयास

 मगर न जाने क्यों नाकाम हुईं

 ख़ुदा ने तो कभी सुनी ही नहीं,छोड़ दी आस

प्रकृति के आगोश में ढूंढा सुकून मगर निराश हुई


दोस्त, प्रियजन , शुभचिंतकों ने साथ तो दिया 

मगर तब तक ही जब तक थी उनको दरकार

भ्रम में जीती रही कि साथ निभाना जानें सब

मन के सच्चे, नहीं खोट उन में,हैं मेरे तलबगार

महीन था इतना मायाजाल,अंधा मुझे कर दिया

विश्वास हुए खोखले जब , लगा अब गई हार

एक बुलंद आवाज़ ने अचानक आगाह किया 

यहां वहां क्या ढूंढ रही अरे नादान,होकर बेजार


 यहां वहां क्या ढूंढ रही अरे नादान , होकर बेज़ार

 झांक ज़रा अपने मन में,समझ अपनी नादानियां

  तू भी कहां दूध की धुली , कल्मष रहित ,खुद्दार

  फंस कर इस मायाजाल में,समझ न पाई गहराइयां

पाले कितने ही भ्रम - जात पात,रीति रिवाज़,रंग रूप के

धर्म अधर्म के ,ग़लत सही के , आडम्बर की शहनाइयां


कर गईं इतनी मद मस्त तुझे जीवन की रानाइयां

 मायाजाल ने भुलवा दिया जीवन का सार

हो गई अलग तुझसे देख ज़रा,तेरी ही परछाइयां

सफलता ने चूमे कदम, पीछे कैसे रहे अहंकार 

पर्दा आंखों के आगे, सब उसी की मेहरबानियां

कब छूटेगा यह व्यामोह, कब होगा साक्षात्कार

मायाजाल के पीछे ओझल,हम से छुपे ज्ञान से।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational