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Ganesh Chandra kestwal

Inspirational

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Ganesh Chandra kestwal

Inspirational

माँ

माँ

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ममता मूरत, हृदय सरल। 

नहीं उपजता चित्त गरल।

नेह बहाती सदा तरल।

निस्पृह करती दान सकल॥१॥


        कुक्षि रचाती, नवल वदन।

        हृदय बनाती, प्रेम-सदन ।

        नौ मास करे, गर्भ वहन।

        प्रसव कष्ट को, करे सहन॥२॥ 


माँ सुख देती, प्रसन्न मन।

चाहे झेले, कष्ट गहन। 

कष्ट न पावे, जातक तन।

करती माता, कोटि जतन॥३॥


        जात देखकर, खिले नयन।

        उसके हित का, करे चयन ।

        पोषण करती, रात व दिन।

        माँ बलिहारी, पल पल गिन॥४


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