STORYMIRROR

Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

3  

Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

मां सरस्वती की स्तुति

मां सरस्वती की स्तुति

1 min
269

सबको निर्मल मति देनेवाली

मेरे शब्दों को गति देनेवाली

नमन है माँ शारदे तुझको,

मेरे तम को मिटानेवाली


तेरी वंदना करता हूं माँ सरस्वती

मेरे पतझड़ को मिटानेवाली

सबके ही मनको हर्षानेवाली

नमन है माँ वीणापाणि तुझको

ज्ञान ज्योत हृदय में जलानेवाली


मूर्ख कालिदास को

विद्वान बनानेवाली

भक्ति करता हूं माँ भारती तेरी

सारे जग को अक्षय ज्ञान देनेवाली

टूटे फूटे शब्दों से ही प्रसन्न होनेवाली


आराधना करता हूं माँ तेरी,

मेरे अधरों को सूरदेनेवाली

इस साखी को मां देना

अपने चरणों में स्थान


निर्रथक शब्दों को मेरे

अपना आशीष देनेवाली

नमन है माँ शारदे तुझको

सारे जग का कल्याण करनेवाली।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract