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Shweta Hirwani

Abstract

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Shweta Hirwani

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माँ बयां न कर पाए वो एहसास

माँ बयां न कर पाए वो एहसास

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अल्फ़ाज़ नहीं बने जिनके लिए 

वो बयान करने जा रही हूँ,

शब्द नहीं बने उनके लिए,

पर कोशिश करने जा रही हूँ,


अधूरी है हर शाम 

उनसे बात के बिना,

पूरा भी हुआ हर चाँद 

उनका भाई जो बना,


रिश्ते की हर डोर

उनसे ही तो बानी,

एहसास उन्हें हमारे हर पल का,

धड़कनों से जो है जुड़ी,


ख्वाब हमारे होते पर 

रास्तें पे संग वो भी चली,

ढूंढ़ते जिन्हें हम हर जगह,

हमारे रूह्ह में वो है बसी,


धूप में छाओ का एहसास है वो ,

मुस्कान से आए आँखों के 

अक्श की मिठास है वो ,

आशीर्वाद से भरा सर पे हाथ है वो,


मंज़िल है सारे अपने जब 

उनका साथ है वो,

जिन से हम सब कुछ 

और उनके बिना हम 

कुछ नहीं माँ है वो,

माँ है वो।


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