मां बाप की दोहरी शक्ति
मां बाप की दोहरी शक्ति
जब बनती है एक औरत मां
हो जाती है वह अपने आप में पूर्ण,
करते पूरे जतन से रक्षा अपनी अपने प्रिय बच्चों की
कभी प्यार से कभी लाड से कभी फटकार से कभी मार के कभी समझ के यह सब एक मां ही कर सकती है।
क्योंकि इतनी शक्ति उसमें ही होती है दोहरी नहीं होती तिहरी शक्ति होती है।
हर तरह से बच्चे को समझाने संभालने की शक्ति होती है।
जब वह मां बनती है तो बच्चों में ही उसका दिन कट जाता है।
अपने आप को भूल उनकी ही हो जाती है। जो कोई बच्चों को नुकसान पहुंचा है तो मां चंडी बन जाती है।
और जो बच्चे कोई गलती करें तो उनको वह डांट लगाती है।
फिर प्यार से समझा कर उनको गले लगाती है।
इस समय में बच्चों के पिता का साथ भी पाती है
मां-बाप मिलकर बच्चों को बहुत प्यार से पालते हैं।
तन मन धन से बच्चों को अच्छा नागरिक बनाने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर जाते हैं।
अच्छा नागरिक बनाने में और संस्कार सींचने में लग जाते है।
ईश्वर ने औरत को ऐसे गुण से नवाजा है जो ममता कहलाता है
और वह ममता अपने बच्चों पर लुटाती है।
जिंदगी भर में बच्चों को रास्ता दिखाती रह जाती है।
उस समय वह खुद को भूल जाती है।
ईश्वर प्रदत यह दोहरी शक्ति का गुण हर मां में कूट-कूट कर भरा है।
मुझे वह इंसान की मन हो
या पशु पक्षी की मां तो मां होती है।
मगर जमाना ऐसा आया जो मां-बाप बच्चों पर अपना सब कुछ न्योछावर करते है।
बड़े हुए बच्चे उनको ही भूल जाते हैं और उनके साथ दुर्व्यवहार कर जाते हैं।
कुछ अपवाद को ले लो बाकी ज्यादातर ऐसा ही हो रहा है।
जो बदलते समाज की कहानी कह रहा है।
हम खुश नसीब है कि हमारे बच्चे ऐसे नहीं है।
मगर आसपास देखकर दिल रो रहा है।
माता-पिता की दोहरी शक्ति
से किए गए संस्कार सींचन को जब बच्चे भूल जाते हैं।
तो उन मां-बाप पर क्या गुजरती होगी यह भी भूल जाते हैं कि उनके भी बच्चे हैं।
वह भी उनके साथ ऐसा कर जाएंगे।
तब क्या होगा यह कहां जाएंगे।
एक मां बाप अपने पास सीमित साधनों में पांच बच्चों को पाल लेते हैं।
मगर वो ही पांच बच्चे आलीशान मकान में रहते हुए एक मां-बाप को नहीं पाल पाते हैं।
इसीलिए विमला यह कहती है।
अपने मां-बाप की करो तुम इज्जत तो आशीर्वाद के साथ पाओगे जिंदगी अच्छी और आगे
तुम्हारे बच्चे भी उसको देखकर बहुत कुछ सीखेंगे।
और तुमको भी इज्जत से रखेंगे।
और जिंदगी में भी तुम बहुत इज्जत पाओगे। अपनी दोहरी शक्ति को काम लगाओ।
अच्छी संतान बन कर दिखाओ।
मां-बाप के सिखाए संस्कारों को तुम जिंदगी में अपनाओ।
