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Somal Preet

Abstract

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Somal Preet

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कविता

कविता

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 अपने अतीत में गुम हो जाने को जी चाहता है,

 कुछ हादसे ऐसे भी गुजरे जिन्हें दोहराने को जी चाहता है...


 दुनिया से बेखबर मिट्टी के घर बना कर खेला करते थे जब,

उसी बचपन में फिर से लौट जाने को जी चाहता है.....


 वो पीपल की छांओ वह प्यार के मंजर 

खुले ऊँचे ठहाके फिर से लगाने को जी चाहता है...


 वो बारिश का पानी वो कागज की कश्तियां 

खेल खेल में जहाज बनाकर उड़ाने को जी चाहता है...


 या रब लौटा दे वो पहले सी दौलत 

वो बचपन की मस्तियां उड़ाने को जी चाहता है... 




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