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Raunaq Chauhan

Abstract

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Raunaq Chauhan

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क्षणभंगुरता

क्षणभंगुरता

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जो पूछना नहीं भूलते

कैसे हैं आपके पौधे ..

उन्हें पता है 


आपकी जान बसती है

अपने पौधों में,

जैसे कहानियों में


अक्सर राजा की

जान बसती थी 

हरे तोते में


उन्हें आभास है

जीवन की

क्षणभंगुरता का


इसलिए जी उनका

उत्साह से छलकता

स्वच्छ ताल गहरा..


जिसमें खिलते

अनुभूति के कमल

जल में सजल

जीवन का प्रति पल


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