STORYMIRROR

Jyoti Mehra

Abstract

4  

Jyoti Mehra

Abstract

खुशियों के रंग

खुशियों के रंग

2 mins
378

अबके बरस हो खुशियों की बौछार

बरसेंगे जब रंग हज़ार

दिलों की दूरियां हो काम

मिट जाए सारे गम।


इस नववर्ष में जब रंग बरसे

अपनों से मिलने को किसीके भी नैना न तरसे

तेरी हंसी से खिल जाए ये त्यौहार

पिचकारी से जब निकले पानी की फुहार।


बच्चों की किलकारियों से गूँज उठे सारा संसार

दोस्तों का कर पाए हम फिर से दीदार

ज़िन्दगी के दिन हैं चार

इससे होने न दे बेकार।


खुद पर रखके पूरा विश्वास

करना तुम प्रयास

 मन में भर दो इतनी मिठास

की हर दिन लगे खास।





Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract