STORYMIRROR

Shikhaa Sharma

Abstract

3  

Shikhaa Sharma

Abstract

खुद से मुलाकात

खुद से मुलाकात

1 min
11.6K

आज दो घड़ी के लिए खुद से मुलाकात की 

कितनी ज़िंदा हूं यह जानने की तहकीकात की 

मुस्कुराते होठों दमकते चेहरे के पीछे कहीं कुछ दफन तो नहीं !!

उन वजाहतों को कुरेदने की कोशिश की 

पर सुकून हुआ ये जान कर कि

हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे हमेशा कोई 

दर्द ही नहीं छिपा रहता उसकी मुस्कुराहट के पीछे 

उसका शीशे की मानिंद चमकता उसका बीता कल होता है

जो आज की मुस्कुराहट हो उसकी पहचान बनाता है ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract