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Illa Kanungo Mohapatra

Abstract Inspirational

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Illa Kanungo Mohapatra

Abstract Inspirational

खुद के अंदर ढूंढो मानवता को

खुद के अंदर ढूंढो मानवता को

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अमावस की अंधेरों में,

आज कहीं खो गया है मानवता

नहीं दिख रहा है उसका छवि

हर तरफ हाथ घुमा घुमा के

ढूंढ रहे हैं हम सब उसे

काश ऐसी गहरी अंधेरे में

हाथ अचानक से उसे छू ले

बस इतना सा कल्पना है

पर हाथ टकराता है

एक कांटो भरी पेड़ से

जो छल और धोखे से भरा होता है

दिल से खून बहने लगता है

उस कांटे की आघात से

पर मानवता कहीं नहीं मिलता है

फिर मन की अंदर से ,

एक सवाल आता है

कोई मन की अंदर से पूछता है

और कोई मन के अंदर से उत्तर भी देता है

क्या तुमने ढूंढा है उससे,

उस मानवता को अपने अंदर

फिर वही मन के भीतर से

कोई बोलता है

हां यह तो सच है !

हम यहां वहां हर जगह

उसे ढूंढ रहे हैं

पूरी दुनिया में ढूंढ रहे हैं

पर यह दुनिया तो हमसे है!

खुद में अगर थोड़ी सी

मानवता को बचा के रखे

तो कहीं ढूंढने नहीं पड़ेगी !


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