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Akriti Rajawat

Abstract Classics Others

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Akriti Rajawat

Abstract Classics Others

खोई दोस्ती की कसक

खोई दोस्ती की कसक

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तू थी मेरी करीबी यार!
मिलते अपने अचार विचार।

गलतफहमी ने खड़ी की काली दीवार,
छोटी सी बात ने तोड़ा हमारा आपसी प्यार।

अब तू दूर खड़ी, नज़रें न मिलाती,
दिल रोता बुलाए, तू क्यूँ न आती?

याद आते वो दिन, हँसी-मज़ाक भरे,
स्कूल में पढ़ाई करे मस्ती से धमाल भरे।

काश तू लौट आए, गले लगा ले फिर से,
मिटे ये गलतफहमी, बने यारी फिर से।

तेरी कमी सताए, रातें कटें उदास होकर,
आजा माफ़ कर दे एक दूसरे को सॉरी बोलकर, दोस्ती शुरू कर खुशी के आंसू रोकर।

अकृति राजावत


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