STORYMIRROR

Hemant Yadav

Abstract

3  

Hemant Yadav

Abstract

खामोशी

खामोशी

1 min
12.9K

मुझे नहीं चाहिए

वो जो पढ़ सकें मेरी खामोशी


मुझे वो चाहिए

जो मुझे खामोश ही ना होने दें


मुझे वो चाहिए

जिसके साथ बिना बात के भी


बातें की जा सके

जिसके साथ लड़ते झगड़ते


हंसते खिलखिलाते

जीवन का हर पल

नये रंग से भर जाये।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract