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Deepak Joshi

Inspirational

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Deepak Joshi

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काश! मैं मिट्टी होता!

काश! मैं मिट्टी होता!

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काश! मैं मिट्टी होता! 

वायु में बिना पंख उड़ जाता, 

पानी में बिना हलचल बह जाता,

पैरों मैं चिपककर मेहराब तक पहुंचता,

फिर पायदान पर दिनों तक आराम फरमाता, 

काश! मैं मिट्टी होता! 


सुन्दर काया बूढ़ी होकर, गल जाती है। 

फिर मिट्टी में ही आखिर मिल जाती है।

फिर क्या गर्व करूं, कि मैं इन्सान होता !

पैदा होकर रोता, या मरने पर रोता! 

फिर यही सोचकर कहता कि, 

काश! मैं मिट्टी होता! 


सैकड़ों के घर बनवाता, कोटी कोटी जन्म दिलवाता, 

सब मरते, तो भी साथ निभाता। 

बच्चों को खेलना सिखाता, किसान की पैदावार बढ़ाता।

सैनिक के माथे पर सजकर, माता सा सम्मान पाता,

 काश! मैं मिट्टी होता !


यह जीवन मनुष्य का पाकर, 

जाने मुझे क्या ही मिल पाता?

मिट्टी से पैदा होकर मिट्टी में मिल जाता। 

फिर क्यों न मांगू ईश्वर से कि,

काश! मैं मिट्टी होता! 

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