STORYMIRROR

Shubham Srivastava

Abstract

2  

Shubham Srivastava

Abstract

ज्वलंत

ज्वलंत

1 min
376

कुछ तो होगा उस बन्दे में

जिसे लगा है जमाना गिराने में।


इंसानियत सीखी उसने

जब लोगों ने फरियादें माँगी।


टूटते हुए तारों से

और गिरा पेड़ों से।


जलाकर पूरी तपिश की

इन सर्द रातों की।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract