Shubham Srivastava
Abstract
कुछ तो होगा उस बन्दे में
जिसे लगा है जमाना गिराने में।
इंसानियत सीखी उसने
जब लोगों ने फरियादें माँगी।
टूटते हुए तारों से
और गिरा पेड़ों से।
जलाकर पूरी तपिश की
इन सर्द रातों की।
मुर्दा
21वीं सदी
लाल सलाम (सीध...
ज्वलंत
मुलाक़ात
कलमकार
तुम जरुरी हो
लोगों से मिलता यह, हाथों में लग जाता है। आँख, नाक ,मुख से, प्रवेश शरीर में कर जाता है। लोगों से मिलता यह, हाथों में लग जाता है। आँख, नाक ,मुख से, प्रवेश शरीर में कर...
आदर है जहाँ सभी धर्मों का, वह देश हिंदुस्तान है।। आदर है जहाँ सभी धर्मों का, वह देश हिंदुस्तान है।।
कविताएं , देती हैं सामर्थ्य, स्वयं, सहर्ष जीने के लिए।। कविताएं , देती हैं सामर्थ्य, स्वयं, सहर्ष जीने के लिए।।
मैंने मन ही मन कभी ईश्वर को इतना नही पुकारा जितना उसे पुकारा। मैंने मन ही मन कभी ईश्वर को इतना नही पुकारा जितना उसे पुकारा।
चिंताएँ कभी ख़त्म नहीं होतीं नींद में भी घुसपैठ कर जाती हैं। चिंताएँ कभी ख़त्म नहीं होतीं नींद में भी घुसपैठ कर जाती हैं।
चौखट के अंदर हो या बाहर, खुशियों को सजाती नारी। चौखट के अंदर हो या बाहर, खुशियों को सजाती नारी।
क्रीड़ा में भी सखा से पराजय मिलनी थी उन्हें स्वीकार। क्रीड़ा में भी सखा से पराजय मिलनी थी उन्हें स्वीकार।
कितने लोगों का संघर्ष छुपा इसमें कितनों का बलिदान, कितने लोगों का संघर्ष छुपा इसमें कितनों का बलिदान,
थोड़ा इधर उधर हमें फँसा देते हैं पर हमें फँसा देखकर दुःखी वे भी होते हैं थोड़ा इधर उधर हमें फँसा देते हैं पर हमें फँसा देखकर दुःखी वे भी होते हैं
आपका सबका स्वागत है श्रीमान, आप सब तो हैं प्यारे-प्यारे मेहमान। आपका सबका स्वागत है श्रीमान, आप सब तो हैं प्यारे-प्यारे मेहमान।
इस तरह एक चमत्कार की आशा में सदा, जिंदगी के सारे जहर मुस्कुरा कर पिया करते हैं। इस तरह एक चमत्कार की आशा में सदा, जिंदगी के सारे जहर मुस्कुरा कर पिया करते है...
निरन्तर गहरे एक अन्धक सफर में मैने एक रौशनी को पहचाना है। निरन्तर गहरे एक अन्धक सफर में मैने एक रौशनी को पहचाना है।
सार्थकता में महत्वपूर्ण व निभाती रहस्यात्मक ज्ञान है सार्थकता में महत्वपूर्ण व निभाती रहस्यात्मक ज्ञान है
पंक्तियां सब कहती है, अहसास करने वाले अगर हो ! पंक्तियां सब कहती है, अहसास करने वाले अगर हो !
आई ताजगी भरी सुबह, धरती कर ली नव श्रृंगार। आई ताजगी भरी सुबह, धरती कर ली नव श्रृंगार।
क्या गीत ग़ज़ल दिल से गाऊॅं क्या तुम्हें सुनाएं हाल-ए-दिल। क्या गीत ग़ज़ल दिल से गाऊॅं क्या तुम्हें सुनाएं हाल-ए-दिल।
वक़्त और हालात कैसे भी हो जाएं, चलूँ सच्चाई की राह, वक़्त और हालात कैसे भी हो जाएं, चलूँ सच्चाई की राह,
आज क्या लिखूंँ? प्यार, संगीत, क़िताब, खुशी दुख या निराशा.. आज क्या लिखूंँ? प्यार, संगीत, क़िताब, खुशी दुख या निराशा..
रिश्तों को महकाए जो ऐसी रंगों की उड़ान होली, रिश्तों को महकाए जो ऐसी रंगों की उड़ान होली,
बच्चे, बड़े पुरातन कपड़ों की माँग करें, तो यकीं रखना की फागुन आया हैं।। बच्चे, बड़े पुरातन कपड़ों की माँग करें, तो यकीं रखना की फागुन आया हैं।।