STORYMIRROR

anuradha nazeer

Abstract

2  

anuradha nazeer

Abstract

ज़िंदगी

ज़िंदगी

1 min
221

जिंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ में। 

हम सब तो उनके हाथों में खेलने की कठपुतली है। 

जब उसने फौरन बुलाया तो??   

फौरन निकल जाने की जरूरत है।

कौन, कब, कैसे, क्रम संख्या तो  मालूम नहीं हमें!!!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract