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anuradha nazeer

Abstract

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anuradha nazeer

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ज़िंदगी

ज़िंदगी

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जिंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ में। 

हम सब तो उनके हाथों में खेलने की कठपुतली है। 

जब उसने फौरन बुलाया तो??   

फौरन निकल जाने की जरूरत है।

कौन, कब, कैसे, क्रम संख्या तो  मालूम नहीं हमें!!!


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